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parampujy Guruvar Sudhanshuji Maharaj ka Shishay

Tuesday, November 3, 2009

बहस करते करते वहाँ मत पहुँचो

उपयोगी बातें


  • बहस करते करते वहाँ मत पहुँचो जहाँ तकरार होने लग जाए !
  • कहीं से भी सुधार कर लो चाहे शाम हो वहीं से सुभह समझो !
  • ज्ञान अर्जन करने के लिए गुरु की शरण में जाओ !
  • प्रणाम करके झुक कर श्रधा से जिज्ञासा करो ताकि वे कुछ बता सकें !
  • साधक ban जाओ जो आपने सीखा उसको नियम वाले बन kar साधना करो !
  • अगर आपने संतोष की साधना की उस पर दिनभर हर काम men संतोशी रहो !
  • जो भी भगवान ने दिया हे vah तो भगवान का प्रसाद हे ,प्रसाद को थोडा जयादा नहीं देखा जाता वह तो भगवान् की क्रपा हे !
  • भगवान् से कहो जो तुझे पसंद हे वही मुझे भी पसंद हो जाए !
  • मन को अभ्यास से और ध्ययान से मन को काबू में कर सकए हो !
  • गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 10/30/2009 12:12:00 PM

Sunday, November 1, 2009

हमारे कर्म हे उलझन हें




  • हमारे कर्म हे उलझन हें !हम ठीक से सोच नहीं पाते तो उलझाते हें ! ठीक से चल नहीं पाते तो उलझाते हें !व्यवहार में दोष आता हे तो उलझाते हें !अगर दुनिया में उलझ जाना , तो एक काम करना -अच्छे ग्रन्थ पढ़ना , सत्संग करना ,एकांत में बैठ कर आत्मचिंतन करना ,इससे आपको बड़ी शान्ति मिलेगी !
  • गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश

Saturday, October 31, 2009

उलझाना

  • हमारे कर्म ही उलझन हें !हम ठीक से सोच नहीं पाते तो उलझाते हें ! ठीक से चल नहीं पाते तो उलझाते हें !व्यवहार में दोष आता हे तो उलझाते हें !अगर दुनिया में उलझ जाना , तो एक काम करना -अच्छे ग्रन्थ पढ़ना , सत्संग करना ,एकांत में बैठ कर आत्मचिंतन करना ,इससे आपको बड़ी शान्ति मिलेगी !
  • गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश

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