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parampujy Guruvar Sudhanshuji Maharaj ka Shishay

Sunday, August 23, 2009

सदगुरु की अमृत वाणी


सदगुरु की अमृत वाणी


"यदि हम आध्यात्मिक नगरी में प्रवेश करना चाहते है तो सबसे पहले वैर को

छोड़ना सीखें । अभी से नियम बनाइये कि मुझे किसी से वैर नहीं रखना। वैर नहीं

तो प्रतिशोध नहीं , बदला भी नहीं । अपने को बदलने में विश्वास रखिये, दूसरों से बदला

लेने की इच्छा नहीं करें ।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज



"If we want to enter the Spiritual World, the very first thing we need to learn is, quit being hostile.
From now onwards, the rule should be not to have animosity towards anyone. No hostility, no revenge
and no settling the scores. Have faith in changing your own self, desire for retaliation shouldn't be there."

His Holiness Sudhanshuji Maharaj


Humble Devotee
Praveen Verma






माया

  • माया तेरे तीन नाम
  • परसा , परसी , परसराम !
  • लुच्चा , गुनडा , बेईमान !
  • अपनी हर मरजी भगवान से जोड़ दो !
  • भक्ति जब जागती हे तो इनसान थोड़े में भी खुश हो जाता है !
  • ऐसे मत चलो की देर हो जाए !
  • हमेशा सोते मत रहो की अवसर निकल जाए !
  • अच्छा काम फोरन करो बुरे काम के लिए देर कर दो !
  • गुरूजी के ६ -१-०५ के टी वी प्रवचन से

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