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parampujy Guruvar Sudhanshuji Maharaj ka Shishay

Thursday, December 24, 2009

मनुष्य के जीवन में सबसे पहले यह






Subject: [AMRIT VANI] अमृत वचन









अमृत वचन


"मनुष्य के जीवन में सबसे पहले यह आवश्यक है कि हर समय प्रभु के अस्तित्व का एहसास हमारे मन में बना रहे। मन में ये प्रश्न हमेशा उठते रहें। इन बहती हुई

नदियों को बहाने वाला कौन है ? रंग-बिरंगी तितलियों के पंखों को कौन रंगता है? कौन है जो इस चन्द्रमा में मुस्कुराता है? किसका प्रकाश सूर्य के द्वारा संसार में फैलता है?


असंख्य जीवों को जन्म कौन देता है? कौन सबको भोजन देता है? फूलों में रंग कौन भरता है? पर्वत किसने बनाए? आकाश को सितारों से कौन सजाता है?


ऐसे अनेक प्रश्नों को मन में पैदा होने दीजिए । इससे आपके मन में ईश्वर के प्रति भावना जागेगी। आपका उनके प्रति विश्वास बढेगा।




परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज



Humble Devotee
Praveen Verma












--
Posted By Madan Gopal Garga to AMRIT VANI at

Sunday, December 20, 2009

परम उद्देश्य

  • जीवन का परम उद्देश्य हे,इश्वर को पाना .परम में पहुँचना किन्तु कितने हें जो इस ओर ध्यान देते हें ? कोई शारीरिक सुख में मस्त हे तो कोई भ्रम जालों में फंसता जा रहा हे !मृत्यु तो सिर के ऊपर नाच रही का . अगले पल का भरोसा नहीं !अब तक भूले हो पर अब न भूलो ! आंखें खोलो सचेत हो जाओ , जीवन क्या हे ? हम क्या हें ? हमारा उद्देश्य क्या हे ? इन प्रश्नों को महत्त्व दो जितना रोटी ,कपड़ा .मकान को देते हो !

  • गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

Saturday, December 19, 2009

महानता

  • मिट्टी की दिली इच्छा थी कि वह कुम्हार से अपने मन की बात कहे ! ऐक दिन अवसर मिलते ही उसने कुम्हार से कहा - मुझे ऐसा पात्र बना दीजिए , जिसमें पूजा का पवित्र जल रखा जाए ! कुम्हार ने उसकी बात सुनकर ;कहा - यह तभी संभव होगा जब फावडे से खुदने ,पैरों से रौदें जाने और आग में तपने का साहस जुटा सको ! इससे कम में महानता की इच्छाएं पूरी नहीं होती हें !
    गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

Thursday, December 17, 2009

मननहीं बदला जाए

----- Original Message ----- To: mggarga@gmail.com
Sent: Thursday, December 17, 2009 4:56 AM
Subject: [ADHYATMIK] मन


जब तक मन नहीं बदला जाए कुछ भी बाहर की चीज़ बदलने से कोई फैदा नहीं !
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

--
Madan Gopal Garga द्वारा ADHYATMIK के लिए 12/17/2009 04:53:00 AM को पोस्ट किया गया

Sunday, December 13, 2009

कुछ उदबोधन और जागृति के अक्षर





सदगुरु की अमृत वाणी






  • कुछ उदबोधन और जागृति के अक्षर अपने सामने रखकर जीवन जीओ जिससे आप सामान्य से ऊपर उठ सकें ।


परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज


Praveen Verma









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    --
    Posted By Madan Gopal Garga to AMRIT VANI at 12/11/2009 09:25:00 PM
  • Wednesday, December 9, 2009

    जब संसार की वासनाओं का

    • जब संसार की वासनाओं का विषधर काटे , तब परमात्मा के नाम की जडी बूटी को चबाना चाहिए किसी विषय वासना का असर काम करेगा ही नहीं , जहर चढ़ेगा ही नहीं !
    • गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

    Tuesday, December 8, 2009

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    Thursday, December 3, 2009

    जिस समय तुम संसार में उलझ

    उलझन



    • जिस समय तुम संसार में उलझ जाओ या परेशान हो जाओ ,अपने हृदय मन्दिर की संवेदना जगाते हुए हृद्य में बैठे भगवान का ध्यान करते हुए उसी से प्रार्थना करो कि हे भगवान ,मुझे रास्ता दिखाओ !आवेश में उलझ न जाऊँ !आवेश में अपने आपको गिराना नही हे ! होश में सोच समझकर शांत रहते हुए जीवन की समस्याओंको सुलझाना हे !आवेश में आयेंगे तो क्रोध का राक्षस शक्तिशाली हो जायेगा और बुधि विवेक नष्ट कर देगा !

      पूज्य सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश

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