🌸 *पूज्यश्री के मधुर स्वरों में अमृतमय भजन - 41*🌸
*किसने दीप जलाया, दीप जलाकर किया उजाला*
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संग्रह के रोग को छोडकर भगवान की ओर जाने का प्रयास करें । उसकी कृपा मिल गई तो समझो सबकुछ मिल गया। यह हमेशा ध्यान रखें कि माल का संग्रह कर उसे सही-सलामत रखने में बहुत बड़ी चिंता होती है, जबकि माला फ़ेरकर प्रभु चिंतन करने में निश्चिंतता आती है। जहाँ निश्चिंतता है वही आनन्द और सुख-शांति है।
परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज