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parampujy Guruvar Sudhanshuji Maharaj ka Shishay

Tuesday, April 23, 2024

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Wednesday, February 28, 2024

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Halle

Friday, December 29, 2023

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Bryant

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Laurina

Friday, June 9, 2023

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Saturday, October 15, 2022

।।ॐ गुरवे नमः।।🙏🏻🌹🙏🏻

हरि ओम जी🙏🏻😊
आज के (15/10/22) दिशा सत्संग के अमृतबिंदू-

🌹 हमे एकाग्रता का अभ्यास करना चाहिए। *आप जो भी चीज करते हो, उसमें एकाग्र हो जाए। पूरा मन उसमें लगाए तो चमत्कार होगा।*

🌹 *भगवान कृष्ण कहते हैं -विभक्त सेवी बनो-एकांत का चयन करना सीखो।* एकांत में जब एकाग्र हो जाए, तो भगवान ने जो अंदर दिया है वह प्रकट होगा। 

🌹 *अटैचमेंट और डिटैचमेंट का भी अभ्यास करें। मन को जोड़ना और ध्यान हटाना भी आ जाए।* इस अभ्यास की *शुरुआत स्वाद को जीतने से करें।* उपवास- व्रत स्वाद जीतने के लिए है। फिर *वाणी का संयम करें, मिताहारी बने।* 

🌹 *तुलसी का पौधा बहुत अद्भुत काम करता है-हमारे पूर्वजों ने इसीलिए घर के बाहर यह पौधा लगाने का विधान दिया।* भगवान को भोग लगाते भी तुलसीदल ऊपर रखा जाता है।

🌹 *तुलसी के पत्ते खून पतला करते हैं। 5 तरह की तुलसी का अर्क पानी में ले तो ज्यादा लाभ मिलता है*। घी और तेल को भी पचाने के लिए भोजन के आधे घंटे बाद गर्म पानी का सेवन करें। *कार्डियो एक्सरसाइज, योग और प्राणायाम जरूर करें।* 

🌹 *हम अपने कंफर्ट झोन से बाहर निकल ने के लिए हिम्मत करें। परिवर्तन के लिए, कष्ट सहने के लिए तैयार रहे तो आप दायरे से बाहर होंगे।*
 कभी-कभी प्रकृति अपने आप परिवर्तन कराती है- पुरानी नौकरी छुट्ती  है, परेशानी आती है। कुछ दिन बाद बड़ा काम मिलता है, पैसा, बड़ी खुशियां मिलती है -तो व्यक्ति शिकायत से बाहर निकलकर धन्यवाद करता है। तब एहसास होता है -पहलेवाली नौकरी छूटती नही तो जो अब मिला है वह नहीं मिलता। *हम परिवर्तन से डरते हैं।* 

🌹 *हमें लेफ्ट और राइट ब्रेन में संतुलन साधना चाहिए।* ज्यादा इमोशनल बने तो धोखा खाएंगे और ज्यादा तार्किक बने तो रिश्तो को संभाल नहीं पाओगे। दोनों में संतुलन जरूरी है। साधना में यही सिखाया जाता है। 

हरि ओम जी🙏🏻😊
आप का हर पल मंगलमय हो, सब सुखी निरोग रहे।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Thursday, July 28, 2022

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Wednesday, June 29, 2022

Saransh

।।ॐ गुरवे नमः।।🙏🏻🌹🙏🏻

हरि ओम जी🙏🏻😊
आज के (29/06/22)दिशा सत्संग का सारांश: 

🚩 *उपनिषद में कहां है- ओंकार धनुष्य बाण है और तीर है आत्मा, और लक्ष्य ब्रह्म- भगवान है जहां आपको चेतना जोड़नी है।* 
ओंकार की गूंज में-लीन होते हुए आप का तीर लक्ष्य तक जा रहा है और आप उससे जुड़ रहे हो। जब लीन होते हो ,तो आपका *शरीर धरती पर है -लेकिन तुम परमात्मा की गोद में हो और उसके आशीष पा रहे हो ऐसा ध्यान हो।*

🚩 जब ॐकार का अभ्यास करते हुए ध्यान में अंदर *घंटानाद- शंखनाद प्रकट हो, अनहद बजे, तब व्याकुलता खत्म होगी*, क्योंकि सिर पर परमात्मा का हाथ होगा। 

🚩 *अनहद प्रकट होने से परम शांति मिलनी शुरू होती है।* अंदर *संतुलन, धैर्य, निश्चिंतता, निर्भयता, खुशी, शांति और तृप्ति* आती है।

🚩 *अनहद सुनने से इतनी तृप्ति आती है कि आपके पास कुछ भी ना हो तो भी आप आनंदी जीवन जीते हो।* 

🚩 *एक राजा* जिसके पास बहुत धन होने के बाद भी दुखी था, वह एक *मस्त बाबा की छाया में बैठकर खुशी पा गया।* 

🚩 *खुशी अंदर, दिल में ,जीने के तरीके, सोच में, विचारधारा में होती है। जिस पर परमात्मा की कृपा है वह हमेशा खुश होगा*।

🚩 *जब तक झूठा अहंकार होगा आप खुशी से दूर होगे।* जब भी शरणागत हो जाओ तो खुशी मिलेगी।

🚩 *शरणागति भी पूरी होनी चाहिए।* एक बिल्ली की तरह और दूसरी बंदरिया की तरह। 


🚩बिल्ली का बच्चा सब कुछ बिल्ली के ऊपर छोड़ता है, पकड़ता नहीं, ढीला है-के बिल्ली उसे पकड़े और जहां चाहे लेकर जाए। 
*आप भी भगवान को सब कुछ मानकर ,सब कुछ उसके ऊपर छोड़ दे- वह "जैसे रखें उसमें खुश" यह बिल्ली की शरणागति है।*

🚩 बंदरिया का बच्चा बंदरिया को पकड़ता है। पकड़ छूटी तो गिरेगा, चोट खाएगा। चिपककर बैठे तो बंदरिया के साथ होगा।
वैसे ही *अगर आप अकल लगाते हो तो आपका नाम- नियम ऐसे बनाओ और भगवान को ताकत से पकड़े रहो, भक्ति छोड़ना नहीं- वह जहां ले जाए -वहां जाए। यह बंदरिया की शरणागति है।*

हरि ओम जी🙏🏻😊
आप का हर पल मंगलमय हो, सब सुखी निरोग रहे।

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

Monday, June 27, 2022

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Saturday, May 7, 2022

Thursday, December 16, 2021

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Monday, November 8, 2021

🌹 *प्रार्थना*🌹

      *हे प्रभु ! मुझे इस लायक बना के रखना की यह तन और मन जिंदगी में आखिरी समय तक सेवा करने के लायक बना रहे।*
        तू इस योग्य बनाकर रखना की मेरी यह वाणी आखिरी क्षण तक तेरा नाम जप कर सके और तेरी सेवा में लगी रहे। तेरे प्रतिनिधियों के लिए दो अच्छे शब्द कह सके। हे प्रभु ! मेरे हाथ सहयोग के लिए सदा उठते रहे। मेरे हाथ जीवन के अंतिम समय तक दान देने के लिए उठते रहे।
        इन पावों में इतनी शक्ति देना की जहाँ पर तेरे नाम की चर्चा होती है वहां चलते रहे। इतना विवश न हो जाऊं की तेरी ओर कदम न बढ़ सके, आँखों में इतनी शक्ति देना की तेरे मंदिर में जाकर तेरे स्वरुप का दर्शन कर सकूँ जिनके साथ बैठने से तेरे संग का रंग लगता है उनकी संगती में बैठ सकूँ, ऐसा आशीर्वाद प्रदान करें।
      हे जगत के आधार ! सत्चिदानन्द स्वरुप !  हे प्रभु ! मै आपको बार बार प्रणाम करता हूँ, अनेक-अनेक, अनन्त-अनन्त, असीम अनुकम्पा के लिए प्रभु आपको नमस्कार करता हूँ।
          हे प्रभु मेरा प्रणाम स्वीकार कीजिये। मै सदैव आपके शरण में रहूँ, आपकी महिमा, व्यवस्था आपके द्वारा बनाए नियम, आपका कानून और आपका प्रसाद जी भी मुझे मिले।
      मै हर किसी वस्तु में और आपके दिए गए हर उपहार को श्रद्धापूर्वक स्वीकार करने वाला बनू, बार बार हर वस्तु को आपका प्रसाद मानूं। हर स्थिति को आपकी कृपा मानु। जैसी भी परीक्षा की घडी में रखो उस परीक्षा में आगे निकलने में मै आपका सहारा मांगता रहूँ। अन्दर से विनम्र बनकर आपके सामने सर झुकाता रहूँ।
      *श्रद्धा भाव से मेरा माथा आपके श्रीचरणों में झुकता रहे। मेरा प्रणाम स्वीकार करो प्रभु।*

*ॐ शांतिः  शांतिः  शांतिः*🌹

Friday, October 22, 2021

अपने बच्चों





अपने बच्चों को अमीर बनाने का प्रयास मत करो,उन्हें अमीर बनाने की विधी सिखा दो।

 

Do not try to make your kids rich; instead teach them the method to become rich.

Tuesday, October 19, 2021

Photo from Madan Gopal Garga

*आज गीता के अमृत ज्ञान में सतगुरु ने 💐अपने कर्तव्य और धर्म का पालन करो💐 यह बताया*।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

💐भगवान श्री कृष्ण ने कहा ,हे अर्जुन ,तू मच्चित होकर मेरी कृपा से सब संकटो को पार कर जाएगा। मगर अहंकार के कारण यदि नहीं सुनेगा तो विनिष्ट हो जाएगा। *अंतरात्मा की आवाज को सुनता हुआ मनुष्य सही निर्णय लेता है* तब वह बड़ी भारी मुश्किलों से बाहर निकल जाता है। अन्यथा माया के प्रभाव में आ जाता है महात्मा बुद्ध के भी अपने शिष्यों ने यही सवाल किया था कि पानी में बहती हुई सभी लकड़ियां क्या समुद्र तक पहुंच जाएंगी।और समझाया कि कुछ रास्ते में अटक जाएंगी कुछ ही समुद्र तक पहुंचेंगी। जो रास्ते में रुक गई वह संसार की माया के कारण अपने लक्ष्य समुद्र तक नहीं जा पाती हैं।

💐अर्जुन के रगों में क्षत्रिय स्वभाव है और केवल एक जगह जाकर वह रुक गया है कि हमारे संबंधी हमारे बड़े मारे जाएंगे ।तो कृष्ण ने कहा कि यह धर्म की लड़ाई है निर्णय लिए जा चुके हैं यदि तुम नहीं  लड़ोगे,तो प्रकृति स्वयं तुम्हें नष्ट कर देगी। क्योंकि *आप प्रकृति के बस में हैं कीमती अक्ल नहीं है कीमती है आदत और स्वभाव*। व्यक्ति के व्यक्तित्व पर आदतें सवार रहती हैं इसलिए गुरु के निर्देशन में सभी कार्य करें।

💐हे अर्जुन तुम इस समय मोह वश मेरे निर्देश को मना कर रहे हो, लेकिन तुम अपने व्यक्तित्व और स्वभाव के द्वारा बाध्य होकर ही कर्म करोगे। ईश्वरीय आदेश को करके मनुष्य गौरव को प्राप्त होता है मनुष्य अपने पिछले स्वभाव के कारण वर्तमान में कार्य करता है इसलिए अपने स्वकर्म और स्वधर्म को पहचानना चाहिए *हम अपने को पूरी तरह परिवर्तित भी कर सकते हैं, जिसके लिए भगवान ने पूरी प्रक्रिया अब तक बताइ* और ऐसा परिवर्तन भी होता है कि लोगों को आश्चर्य होता है

💐 महर्षि बाल्मीकि उनकी पिछली भक्ति एक संजोग से जागृत हो गई, इसी तरह अगर हम भी तपस्या में संचित, क्रियमान कर्म को जलाकर अपने को शुद्ध कर लें, और हम अपने सूक्ष्म शरीर से छुटकारा पाकर के मुक्त होने की स्थिति तक पहुंच सके *जो आगे आने वाले कर्म आ रहे हैं वह आएंगे, लेकिन पिछले कर्मों को तो हम जला सकते हैं*

💐भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि अब तो तुम्हें युद्ध करना ही पड़ेगा ।मनुष्य माया लोक के कारण नीचे की तरफ खींचता जाता है ऊपर जाने के लिए *गुरु के निर्देशन में अपने को हल्का करते हुए ऊपर उठना चाहिए* ,जैसे जल वाष्प बनकर उड़ता है ग्रेविटेशन के साथ लैविटेशन को भी ध्यान रखना चाहिए *भगवान के प्रतिनिधि गुरु, जिसकी आवाज ह्रदय में सुनाई दे रही है उस के निर्देशन में संसार में जीवन जीना चाहिए* ,अन्यथा प्रकृति अपने आप कार्य करा लेगी।
🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️
दिनांक 19 अक्टूबर 2021
संकलनकर्ता रविंद्र नाथ द्विवेदी पुणे मंडल
क्रमशः💐💐💐💐💐💐💐💐 

Wednesday, September 22, 2021

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Saturday, September 11, 2021

हरि बोल 🙏🏻
इस👇 कथा को पढो बहुत अच्छी है 

*सुखी रहने का तरीका*
*********************

      *एक बार की बात है संत तुकाराम अपने आश्रम में बैठे हुए थे। तभी उनका एक शिष्य, जो स्वाभाव से थोड़ा क्रोधी था उनके समक्ष आया और बोला-*

*गुरूजी, आप कैसे अपना व्यवहार इतना मधुर बनाये रहते हैं, ना आप किसी पे क्रोध करते हैं और ना ही किसी को कुछ भला-बुरा कहते हैं? कृपया अपने इस अच्छे व्यवहार का रहस्य बताइए?*

*संत बोले- मुझे अपने रहस्य के बारे में तो नहीं पता, पर मैं तुम्हारा रहस्य जानता हूँ !*

*"मेरा रहस्य! वह क्या है गुरु जी?" शिष्य ने आश्चर्य से पूछा।*

*"तुम अगले एक हफ्ते में मरने वाले हो!" संत तुकाराम दुखी होते हुए बोले।*

*कोई और कहता तो शिष्य ये बात मजाक में टाल सकता था, पर स्वयं संत तुकाराम के मुख से निकली बात को कोई कैसे काट सकता था?*

*शिष्य उदास हो गया और गुरु का आशीर्वाद ले वहां से चला गया।*

*उस समय से शिष्य का स्वभाव बिलकुल बदल सा गया। वह हर किसी से प्रेम से मिलता और कभी किसी पे क्रोध न करता, अपना ज्यादातर समय ध्यान और पूजा में लगाता। वह उनके पास भी जाता जिससे उसने कभी गलत व्यवहार किया था और उनसे माफ़ी मांगता। देखते-देखते संत की भविष्यवाणी को एक हफ्ते पूरे होने को आये।*

*शिष्य ने सोचा चलो एक आखिरी बार गुरु के दर्शन कर आशीर्वाद ले लेते हैं। वह उनके समक्ष पहुंचा और बोला-*

*गुरुजी, मेरा समय पूरा होने वाला है, कृपया मुझे आशीर्वाद दीजिये!"*

*"मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है पुत्र। अच्छा, ये बताओ कि पिछले सात दिन कैसे बीते? क्या तुम पहले की तरह ही लोगों से नाराज हुए, उन्हें अपशब्द कहे?"*

*संत तुकाराम ने प्रश्न किया।*

*"नहीं-नहीं, बिलकुल नहीं। मेरे पास जीने के लिए सिर्फ सात दिन थे, मैं इसे बेकार की बातों में कैसे गँवा सकता था?*
*मैं तो सबसे प्रेम से मिला, और जिन लोगों का कभी दिल दुखाया था उनसे क्षमा भी मांगी" शिष्य तत्परता से बोला।*

*"संत तुकाराम मुस्कुराए और बोले, "बस यही तो मेरे अच्छे व्यवहार का रहस्य है।"*
*"मैं जानता हूँ कि मैं कभी भी मर सकता हूँ, इसलिए मैं हर किसी से प्रेमपूर्ण व्यवहार करता हूँ, और यही मेरे अच्छे व्यवहार का रहस्य है।*

*शिष्य समझ गया कि संत तुकाराम ने उसे जीवन का यह पाठ पढ़ाने के लिए ही मृत्यु का भय दिखाया था ।*

*वास्तव में हमारे पास भी सात दिन ही बचें हैं 😗

*रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि, आठवां दिन तो बना ही नहीं है ।*

🌹👏  *"आइये आज से परिवर्तन आरम्भ करें  और  हरे कृष्ण महामंत्र का जप करे*

🙏🏻सदैव जपिये...
जयश्री कृष्ण
*हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे*
*हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे*

                   🙏🏻खुश रहिये.....☺🙏🏻

Monday, August 30, 2021

Photo from MG Garga

*आज गीता के अमृत ज्ञान  में सतगुरु ने  💐आसुरी वृत्ति के लोग कैसे होते हैं💐 यह समझाया*।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

💐भगवान श्री कृष्ण कहते हैं की, आसुरी वृत्ति के लोग यह मानते हैं कि इस जगत का कोई स्वामी नहीं है, यह काम से प्रेरित संसार, है जिसमें काम ही इस संसार का कारण है ।अन्य कुछ भी नहीं *विश्व को कोई मूल् सत्ता के अधीन नहीं मानते, यह धर्म और अधर्म को कुछ नहीं मानते इस जगत का निर्माण आकस्मिक हुआ है यह उनकी धारणा है* जबकि यह देखा गया है कि बिना व्यवस्था के कोई निर्माण नहीं हुआ है ।और व्यवस्था द्वारा आपको उचित लाभ भी मिलता है। आसुरी वृत्ति के लोग तर्क की बात करते हैं। जबकि ब्रह्मांड 8 चीजों से प्रमाणित है हमारे इतिहास में भी और विभिन्न मत पंतो में भी लोगों ने इसे बहुत ही अलंकारिक ढंग से समझाया। जबकि यह कोई भौगोलिक स्थिति नहीं है परमात्मा के निवास की ।उसे विज्ञान प्रमाणित नहीं करता ,वह अनुभव वाली बात है जबकि *विज्ञान भी यह कहता है कि हम जानकारी प्राप्त करते हुए ,जब अंतिम चरण में पहुंचते हैं तो यह महसूस होता है कि कोई शक्ति तो है*।

💐इस  मिथ्या ज्ञान को अवलंबन करके जिसकी बुद्धि नष्ट हो गई है ।वह क्रूर कर्म करते हुए ,इस संसार को नष्ट करने में ही रुचि रखते हैं और अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं ।यह नष्टआत्मा है जिनकी उच्चतर लोको में पहुंचने की संभावना नहीं रहती ।यह *अशुद्धियों से भरे शरीर को ही अपना जीवन मानते हैं  यह जगत के शत्रु होते हैं*

💐भगवान ने आगे कहा कि इन 6 आसुरी वृत्तियों से भरे लोग क्या क्या करते हैं ।यह 22 तरह के मद पैदा करते हैं हम इन से मुक्त हो। हमारे जीवन के दो छोर हैं एक है शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष है। *दंभ ,मान से युक्त मोह बस, मिथ्या धारणाओं को रखकर, अशुद्ध संकल्पों के साथ जीवन में कार्य करते हैं। ऐसे लोग आसुरी वृत्ति वाले होते हैं* ।विडंबना यह है कि हम इंद्रियों द्वारा प्राप्त सुख को ही सुख मानते हैं जबकि हमें यह याद रखना चाहिए ,कि राजा ययाति 3 जीवन जिए। लेकिन अंत में यही कहा, कि यह शरीर 300 वर्षों तक जवान रहा, और पता चला कि जैसे आग में घी डालने से वह बुझती नहीं ,उसी तरह *भोगों को भोगने से तृप्ति नहीं मिलती। उल्टे मानसिक भोग की विकृति बढ़ती जाती है* वह पागल की स्थिति को प्राप्त होता है
भगवान की व्यवस्था है कि किसी चीज की मात्रा संतुलित हो तो ,आनंद आता है अन्यथा वह पीड़ा बन जाती है ऐसे अपवित्र संकल्प वाले लोग संसार में विचरण कर के संसार को गलत दिशा में ले जाते हैं ऐसे लोग खुद दुखी रहते हैं और दूसरों को भी दुखी करते हैं इतिहास में ऐसे राजा रानी की बहुत सारी कहानियां वर्णित हैं।
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दिनांक 30 अगस्त 2021
संकलनकर्ता रविंद्र नाथ द्विवेदी पुणे मंडल
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